धर्मेन्द्र कुमार सिंह
सनातन धर्म के संरक्षण, मंदिर के विकास, कार्यकारिणी की बैठकों का संचालन एवं समाज सेवा के कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं।
❖ मंदिर का इतिहास:
प्राचीन काल में यह मंदिर वर्तमान स्टेट बैंक के स्थान पर स्थित था। वर्ष 1983 में बिहार राज्य आवास बोर्ड द्वारा उक्त प्लॉट को श्री जागेश्वर प्रसाद (शंकर शॉपिंग सेंटर) को आवंटित कर दिया गया।
जन आक्रोश के कारण बिहार राज्य आवास बोर्ड द्वारा मंदिर को वहाँ से पार्क 45 में शिव लिंग की स्थापना कर मंदिर का रूप दे दिया गया।
इस प्रकार मंदिर का नया स्वरूप अस्तित्व में आया और नियमित रूप से पूजा-अर्चना प्रारम्भ हुई।
वर्ष 1986 में मंदिर की जर्जर एवं अव्यवस्थित स्थिति को देखते हुए स्थानीय श्रद्धालुओं एवं नागरिकों की एक आम सभा आयोजित हुई।
मंदिर के संरक्षण एवं विकास के उद्देश्य से एक समिति का गठन किया गया।
द्वारा मंदिर का संरक्षण एवं विकास आरंभ हुआ।
दो वर्ष पश्चात पुनः आम सभा आयोजित हुई एवं समिति का पुनर्गठन किया गया, इसमें श्री कपिल देव प्रसाद यादव को अध्यक्ष, श्री गौतम प्रसाद भट्ट को सचिव तथा श्री शिवेन्द्र नारायण चौधरी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया।
श्री शिवेन्द्र नारायण चौधरी की अध्यक्षता में मंदिर के संविधान एवं नियमावली बनाई गई।
वर्ष 1989 में श्री हनुमान जी के मंदिर का निर्माण एवं हनुमान जी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। मंदिर के इतिहास में यह महत्वपूर्ण वर्ष सिद्ध हुआ।
दो वर्ष बाद पुनः समिति का पुनर्गठन किया गया। उस समय श्री कौशल कुमार शर्मा को अध्यक्ष तथा श्री अशोक सिन्हा को सचिव के रूप में मंदिर समिति का संचालन करने का दायित्व दिया गया। उनके नेतृत्व में मंदिर के विकास कार्य निरंतर आगे बढ़ते रहे।
इसके पश्चात प्रत्येक 3 साल पर शिव शक्ति मंदिर धार्मिक न्यास की आम सभा होती रही और कार्यकारिणी समिति में थोड़े- बहुत परिवर्तन के साथ मंदिर की कार्यकारिणी अपना दायित्व निभाती रही।
इस कार्यकाल में मंदिर ने अपने वर्तमान स्वरूप की ओर महत्वपूर्ण प्रगति की। श्री आनन्द मिस्त्री, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बिहार राज्य आवास बोर्ड, के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में मंदिर को वर्तमान स्वरूप प्राप्त हुआ। मंदिर के निर्माण में उनका अहम योगदान रहा। वर्ष 2009 में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की स्थापना एवं प्राण-प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई, जिससे मंदिर का धार्मिक एवं सामाजिक महत्व और अधिक बढ़ा। श्री राज नारायण सिंह कोषाध्यक्ष के स्वर्गवास के उपरांत श्री राजीव मोहन तथा श्री देवेन्द्र प्रसाद सिंह के द्वारा समिति के कोषाध्यक्ष के रूप में अहम जिम्मेदारी का निर्वहन किया गया।
वर्ष 2013 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद् के द्वारा जाँचोपरांत मंदिर का निबंधन किया गया।
न्यास की प्रत्येक पहल सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति एवं निःस्वार्थ सेवा की भावना से प्रेरित है।
शाश्वत आध्यात्मिक मूल्यों एवं पवित्र परंपराओं का संरक्षण।
समाज के प्रत्येक वर्ग की करुणा एवं समर्पण के साथ सेवा।
प्रेम, सम्मान एवं संस्कारों के माध्यम से एकजुट समाज का निर्माण।
न्यास के पदाधिकारी एवं सदस्य सनातन धर्म के संरक्षण, मंदिर के संचालन एवं समाज सेवा के लिए समर्पण, पारदर्शिता एवं श्रद्धा के साथ मिलकर कार्य करते हैं।
सनातन धर्म के संरक्षण, मंदिर के विकास, कार्यकारिणी की बैठकों का संचालन एवं समाज सेवा के कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं।
सनातन धर्म की रक्षा, समाज सेवा, अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यकारिणी की बैठकों का संचालन एवं मंदिर के कार्यों में अपना सहयोग देते रहते हैं।
सनातन धर्म के संरक्षण, मंदिर के विकास, नित्य कार्यों का संचालन एवं समाज सेवा के कार्य करने का दायित्व निभाते हैं।
ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था, दान प्रबंधन, मंदिर के विकास में निरंतर सहयोग एवं सहभागिता तथा सनातन धर्म की रक्षा सुनिश्चित करते हैं।
सनातन धर्म की रक्षा, वित्तीय व्यवस्था में सहयोग, मंदिर के विकास में निरंतर सहयोग एवं सहभागिता
सनातन धर्म की रक्षा, समाज सेवा, मंदिर के प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता एवं सहयोग
सनातन धर्म की रक्षा एवं मंदिर के प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता
सनातन धर्म की रक्षा एवं मंदिर के प्रत्येक कार्य एवं अनुष्ठानों में सहभागिता
सनातन धर्म की रक्षा, समाज सेवा, मंदिर के विकास में निरंतर सहयोग एवं सहभागिता
सनातन धर्म की रक्षा, समाज सेवा, मंदिर के विकास में निरंतर सहयोग एवं सहभागिता
सनातन धर्म की रक्षा, मंदिर के प्रत्येक कार्य एवं अनुष्ठानों में सहयोग एवं सहभागिता।
हमारा उद्देश्य केवल मंदिर संचालन तक सीमित नहीं है। सनातन धर्म, आध्यात्मिक चेतना एवं निःस्वार्थ सेवा के माध्यम से समाज के जीवन को बेहतर बनाना हमारा संकल्प है।
ऐसे समाज का निर्माण करना जहाँ सनातन धर्म, आध्यात्मिकता, भारतीय संस्कृति एवं निःस्वार्थ सेवा दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनें।
पूजा-अर्चना, धार्मिक परंपराओं, शिक्षा, अन्नदान सेवा, सांस्कृतिक संरक्षण एवं सामाजिक कल्याण को समर्पण और पारदर्शिता के साथ बढ़ावा देना।
न्यास के प्रत्येक निर्णय, सेवा कार्य एवं आध्यात्मिक गतिविधि का मार्गदर्शन इन्हीं शाश्वत मूल्यों से होता है।
ईश्वर के प्रति अटूट आस्था एवं सनातन धर्म के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता।
समाज, श्रद्धालुओं एवं जरूरतमंदों की करुणा और समर्पण के साथ सेवा करना।
ईमानदारी, उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता के साथ न्यास का संचालन।
भारतीय संस्कृति, पवित्र परंपराओं एवं आध्यात्मिक विरासत का संरक्षण।
समरसता, सहयोग एवं सामूहिक प्रगति को प्रोत्साहित करना।
प्रत्येक जीव के प्रति प्रेम, सम्मान एवं करुणा की भावना को बढ़ावा देना।
श्री शिव शक्ति मंदिर न्यास धार्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से समाज की सेवा करता है।
दैनिक पूजा-अर्चना, आरती एवं पवित्र धार्मिक अनुष्ठान।
धार्मिक ग्रंथों, संस्कारों एवं आध्यात्मिक शिक्षा का प्रसार।
श्रद्धालुओं एवं जरूरतमंदों के लिए भोजन वितरण एवं सामूहिक प्रसाद सेवा।
महाशिवरात्रि, नवरात्रि एवं अन्य पवित्र धार्मिक उत्सवों का आयोजन।
विभिन्न सामाजिक कल्याण एवं मानवीय सेवा गतिविधियाँ।
युवाओं को संस्कार, संस्कृति एवं आध्यात्मिक चेतना की दिशा देना।
आपातकाल एवं आपदा की परिस्थितियों में राहत एवं सहायता प्रदान करना।
वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता।
श्री शिव शक्ति मंदिर न्यास एक विधिवत पंजीकृत धार्मिक एवं सामाजिक न्यास है, जो पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं लागू नियमों के अनुपालन के लिए प्रतिबद्ध है।
| पंजीकरण संख्या | 4260/2013 |
|---|---|
| पंजीकरण तिथि | वर्ष — 2013 |
| PAN | ABFTS2877P |
|---|---|
| बैंक खाता संख्या | CENTRAL BANK OF INDIA Hanuman Nagar Branch A/c No: 1464508361 IFSC Code: CBIN0283353 |
न्यास की सभी गतिविधियाँ लागू कानूनों एवं नियमों के अनुरूप संचालित की जाती हैं। प्राप्त दान राशि का उपयोग धार्मिक, सामाजिक एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों के लिए पारदर्शिता के साथ किया जाता है।
वर्षों से श्री शिव शक्ति मंदिर न्यास आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से निरंतर समाज की सेवा करता आ रहा है।
आपका सहयोग धार्मिक अनुष्ठानों, अन्नदान सेवा, सांस्कृतिक संरक्षण एवं सामाजिक कल्याण की गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने में सहायक है। आइए, मिलकर श्रद्धा, करुणा एवं निःस्वार्थ सेवा के मूल्यों को मजबूत करें।
धार्मिक एवं सामाजिक कल्याण गतिविधियों में सहयोग करें।
हमारी सेवा गतिविधियों का सक्रिय हिस्सा बनें।
पूजा-अर्चना, धार्मिक उत्सवों एवं आध्यात्मिक आयोजनों में सहभागी बनें।